आज़ाद पंछी
वो क़ैद पंछी आज़ाद है अपनी क़ैद से
बरसों बाद मालूम हुआ कि प्यार था उसे क़ैद से
जब मौक़ा मिला उड़ने का
लड़खड़ाए नहीं कदम उसके
उड़ने के लिए बने थे पंख उसके
पंछी को डर नहीं अब रुकने का
आसमान को आज भी उससे प्यार है
पंछी को खतरा है बस चील कव्वों का
जो काटना चाहते हैं उन पंखों को
पंछी को अब लगाव नहीं कैद से
आसमान के प्यार ने अपना बना लिया उसे
पंछी को अब डर नहीं है इन सबका
क्योंकि अब पूरा जहां है उसका
- आतिफ़ा ऐमन
Also read - https://atifaaimen2.blogspot.com/2020/05/blog-post_17.html?m=1


Well written👏👏👏
ReplyDeleteNice di
ReplyDeleteNice 👍
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