मेरी अम्मी
मेरी अम्मी
अंधेरी रात में रौशनी की तरह हैं मेरी अम्मी
मेरे बचपन का पहला प्यार हैं मेरी अम्मी
जो बोलने से पहले मेरे मन की बात समझ जाएं वो हैं मेरी अम्मी
डांट डांट कर प्यार जो जताएं वो हैं मेरी अम्मी
जो मेरा हर मन पसंद खाना बनातीं वो हैं मेरी अम्मी
जो मेंरे हर नखरे को सुधारतीं वो हैं मेरी अम्मी
बाहर जाकर जिसकी कमी सबसे ज़्यादा महसूस हुई वो हैं मेरी अम्मी
मुश्किलों की हर घड़ी में जिसकी याद सबसे ज़्यादा आई वो हैं मेरी अम्मी
अम्मी न होतीं तो मैं वो न होती जो आज हूँ
अम्मी की क़ुर्बानियों की बदौलत ही मैं आज़ाद हूँ ।
मेरे बचपन का पहला प्यार हैं मेरी अम्मी
जो बोलने से पहले मेरे मन की बात समझ जाएं वो हैं मेरी अम्मी
डांट डांट कर प्यार जो जताएं वो हैं मेरी अम्मी
जो मेरा हर मन पसंद खाना बनातीं वो हैं मेरी अम्मी
जो मेंरे हर नखरे को सुधारतीं वो हैं मेरी अम्मी
बाहर जाकर जिसकी कमी सबसे ज़्यादा महसूस हुई वो हैं मेरी अम्मी
मुश्किलों की हर घड़ी में जिसकी याद सबसे ज़्यादा आई वो हैं मेरी अम्मी
अम्मी न होतीं तो मैं वो न होती जो आज हूँ
अम्मी की क़ुर्बानियों की बदौलत ही मैं आज़ाद हूँ ।
-आतिफ़ा ऐमन



👏👏👏
ReplyDelete☺️☺️
Delete👌👐👏
ReplyDeleteThank you 😊
DeleteWahhh👌👌
ReplyDeleteShukriya 💕
Delete👏👏👏👏 well written
ReplyDeleteThank you 😊
Delete👏👏
ReplyDeleteThanks 😊
DeleteMaShaAllah... very well written
ReplyDeleteThanks 🤗
DeleteMasha Allah heart touching lines
ReplyDeleteMashallah love u beta u too r quiet sweet jazakallah khair
ReplyDeleteMaShaAllah
ReplyDeleteVery well written
Very true..!
Bahut khoob, salamat raho...!!!
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