देश बदल रहा है
जो लड़ाई हक़ की पहले लड़ी गयी थी,
वो आज फ़िर लड़नी पड़ रही है।
जो आज़ादी के नारे पहले लगाऐ गए थे,
वो आज फ़िर आज़ाद देश में लगाऐ जा रहे हैं।
जो औरतें पर्दे में रहा करती थीं,
आज उन्हें भी सड़कों पर उतरना पड़ रहा है।
जो बच्चे कॉपी और क़लम उठाया करते थे,
आज वो आवाज़ उठा रहे हैं।
जो आज चुप हैं वो कल भी चुप रहेंगे,
जो आज जागे हैं अब वो नहीं सोएंगे।
कौन कहता है कि विकास नहीं हुआ है,
देखो देश कितना बदल रहा है।
- आतिफ़ा ऐमन
वो आज फ़िर लड़नी पड़ रही है।
जो आज़ादी के नारे पहले लगाऐ गए थे,
वो आज फ़िर आज़ाद देश में लगाऐ जा रहे हैं।
जो औरतें पर्दे में रहा करती थीं,
आज उन्हें भी सड़कों पर उतरना पड़ रहा है।
जो बच्चे कॉपी और क़लम उठाया करते थे,
आज वो आवाज़ उठा रहे हैं।
जो आज चुप हैं वो कल भी चुप रहेंगे,
जो आज जागे हैं अब वो नहीं सोएंगे।
कौन कहता है कि विकास नहीं हुआ है,
देखो देश कितना बदल रहा है।
- आतिफ़ा ऐमन


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